मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा चुनाव हारे: ZPM को 40 में से 27 सीट; MNF को 10, भाजपा को 2 और कांग्रेस एक पर जीती

आइजोल4 मिनट पहले

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मिजोरम के 40 विधानसभा सीटों का रिजल्ट आ गया है। इस बार नई नवेली पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को 10, भाजपा को 2 और कांग्रेस के खाते में एक सीट आई हैं।

मिजोरम में सबसे बड़ा उलटफेर आइजोल ईस्ट-1 सीट पर हुआ। यहां मुख्यमंत्री जोरमथंगा चुनाव हार गए। उन्हें ZPM के ललथनसंगा ने 2 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। हार के बाद CM ने डॉ. हरि बाबू कंभमपति से मुलाकात कर इस्तीफा दे दिया।

ZPM की जीत पर पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार लालदुहोमा ने कहा- मैं पार्टी की जीत से खुश हूं। मुझे इसी तरह के नतीजों की उम्मीद थी। अगले दो दिनों के अंदर मैं राज्यपाल से मिलूंगा। शपथ ग्रहण इसी महीने होगा। लालदुहोमा इंदिरा गांधी के सिक्योरिटी इंचार्ज और कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं।

छह दलों के गठबंधन से बनी थी जोरम पीपुल्स मूवमेंट
जोरम पीपुल्स मूवमेंट पार्टी शुरुआत में छह क्षेत्रीय दलों का गठबंधन था। जिसमें मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जोरम नेशनलिस्ट पार्टी, जोरम एक्सोडस मूवमेंट, जोरम डिसेंट्रलाइजेशन फ्रंट, जोरम रिफॉर्मेशन फ्रंट और मिजोरम पीपुल्स पार्टी शामिल थीं।

2018 में ZPM ने इसी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था और आठ सीटें जीतीं। इसके बाद चुनाव आयोग (ECI) ने आधिकारिक तौर पर जुलाई 2019 में पार्टी को रजिस्टर्ड किया। सबसे बड़ी संस्थापक पार्टी मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, 2019 में गठबंधन से बाहर हो गई थी और बाकी बची पांच पार्टियां एक में शामिल हो गईं, जिसे ZPM नाम दिया गया।

कौन हैं जोरम पीपुल्स मूवमेंट के नेता लालदुहोमा

लालदुहोमा एक पूर्व IPS अधिकारी हैं। जो पूर्व PM इंदिरा गांधी की सिक्योरिटी संभाल चुके हैं। अभी राहुल गांधी की संसद सदस्यता गई थी तो लालदुहोमा एक बार फिर चर्चा में आ गए थे।

दरअसल, लालदुहोमा ने 1984 में मिजोरम से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सीट जीती थी। बाद में उनका राज्य कांग्रेस के नेताओं से मतभेद हो गया और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। वे 1988 में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले लोकसभा सांसद बने। 2018 में लालदुहोमा ने आइजोल पश्चिम- I और सेरछिप से निर्दलीय चुनाव जीता।

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