मजदूरों के रेस्क्यू के बाद CM धामी ने ईगास-पर्व मनाया: सभी 41 मजदूर स्वस्थ, 48 घंटे ऑब्जर्वेशन में रहेंगे

उत्तरकाशी3 घंटे पहले

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टनल से मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने के खुशी में देहरादून स्थित सीएम आवास पर ईगास पर्व मनाया गया। - Dainik Bhaskar

टनल से मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने के खुशी में देहरादून स्थित सीएम आवास पर ईगास पर्व मनाया गया।

उत्तरकाशी के सिल्क्यारा टनल से सभी 41 मजदूरों के सुरक्षित निकलने के बाद बुधवार रात देहरादून स्थित सीएम आवास पर ईगास पर्व मनाया गया। इसमें सीएम धामी समेत कुछ मजदूरों के परिजन भी शामिल हुए। उत्तराखंड में दीपावली के 11 दिन बाद ईगास पर्व मनाया जाता है।

सभी 41 मजदूर पूरी तरह स्वस्थ हैं। बुधवार को ऋषिकेश​​​​​​ AIIMS में सभी का मेडिकल चेकअप हुआ। उन्हें यहां 48 घंटे तक ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। AIIMS की CEO प्रोफेसर मीनू सिंह ने कहा- सभी मजदूरों का हमने ECG कराया है। सभी स्वस्थ हैं। उनका ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल भी सही है।

दोपहर को इंडियन एयरफोर्स के चिनूक हेलिकॉप्टर से​​​​​​ मजदूरों को चिन्यालीसौड़ से ऋषिकेश शिफ्ट किया गया था। इससे पहले मंगलवार को टनल से रेस्क्यू के बाद मजदूरों को चिन्यालीसौड़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की देखरेख में रखा गया था। यहां रात भर इन्होंने आराम किया।

उत्तरकाशी के CMO आरसीएस पवार ने आज सुबह बताया कि उन्हें देर रात और सुबह नॉर्मल डाइट दी गई। उनकी मेंटल हेल्थ की काउंसलिंग भी की गई है।

तस्वीरों में देखिए CM हाउस में ईगास पर्व

सीएम हाउस में ईगास पर्व मनाया गया। यह दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है।

सीएम हाउस में ईगास पर्व मनाया गया। यह दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है।

सीएम धामी ने मजदूरों के परिजन के साथ डांस किया।

सीएम धामी ने मजदूरों के परिजन के साथ डांस किया।

उत्तराखंड के सीएम धानी ने मजदूरों के परिजन को शॉल देकर सम्मानित किया।

उत्तराखंड के सीएम धानी ने मजदूरों के परिजन को शॉल देकर सम्मानित किया।

सीएम धामी ने मजदूरों के परिजन के साथ खाना खाया।

सीएम धामी ने मजदूरों के परिजन के साथ खाना खाया।

मजदूर के परिजन को विदा करते सीएम धामी।

मजदूर के परिजन को विदा करते सीएम धामी।

मजदूरों को चिन्यालीसौड़ से​​​​​​ ऋषिकेश​​​​​​ AIIMS तक एयरलिफ्ट किया गया

बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे चिनूक हेलिकॉप्टर से मजदूरों को चिन्यालीसौड़ से ऋषिकेश एयरलिफ्ट किया गया।

बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे चिनूक हेलिकॉप्टर से मजदूरों को चिन्यालीसौड़ से ऋषिकेश एयरलिफ्ट किया गया।

चिनूक से उतरने के बाद सभी मजदूर एम्बुलेंस से AIIMS के लिए रवाना हुए।

चिनूक से उतरने के बाद सभी मजदूर एम्बुलेंस से AIIMS के लिए रवाना हुए।

टनल से निकाले गए सभी 41 मजदूरों का ऋषिकेश AIIMS में ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेबल चेक किया गया। सभी का ECG भी किया गया।

टनल से निकाले गए सभी 41 मजदूरों का ऋषिकेश AIIMS में ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेबल चेक किया गया। सभी का ECG भी किया गया।

मजदूरों की PM मोदी से बात हुई, शेयर किए 17 दिन के अनुभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार देर रात टनल से निकाले गए मजदूरों से फोन पर बात की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार देर रात टनल से निकाले गए मजदूरों से फोन पर बात की।

PM मोदी ने नवयुवा इंजीनियर कंपनी लिमिटेड के सबाह अहमद से पहले बातचीत की। PM ने कहा कि 17 दिन कम नहीं होते। आप लोगों ने बड़ी हिम्मत दिखाई। एक दूसरे का हौसला और धैर्य बनाए रखा। मैं लगातार जानकारी लेता रहता था। CM पुष्कर सिंह धामी के संपर्क में था।

सबाह: सर, हमें कभी एहसास नहीं हुआ कि हम कमजोर पड़ रहे हैं। कभी घबराहट नहीं हुई। सभी मजदूर अलग-अलग राज्यों से थे, लेकिन हम भाई जैसे रहते थे। खाना आता था तो सभी मिलजुल कर खाते थे।

PM मोदी: मैंने सुना है कि आप लोग टनल में योग भी करते थे।

सबाह: हम रोज सुबह योग करते थे। वहां खाने-पीने के अलावा कुछ करने को नहीं था, तो हम मॉर्निंग वॉक और योग करते थे, ताकि सेहत बनी रहे। एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाते थे।

अब टनल से जुड़ी PHOTOS…

टनल के ठीक बगल में बाबा बौखनाग का मंदिर है। यहां बुधवार सुबह पूजा की गई।

टनल के ठीक बगल में बाबा बौखनाग का मंदिर है। यहां बुधवार सुबह पूजा की गई।

यह फोटो बुधवार सुबह की है। सिल्क्यारा टनल में एक से दो लोगों को छोड़कर सन्नाटा दिखा।

यह फोटो बुधवार सुबह की है। सिल्क्यारा टनल में एक से दो लोगों को छोड़कर सन्नाटा दिखा।

ये टनल के उस हिस्से की फोटो है, जहां 41 मजदूर फंसे थे। रेस्क्यू से पहले उन्हें नए कपड़े और जूते पहनाए गए।

ये टनल के उस हिस्से की फोटो है, जहां 41 मजदूर फंसे थे। रेस्क्यू से पहले उन्हें नए कपड़े और जूते पहनाए गए।

ये न होते तो शायद मजदूर भी न बचते

  • 12 नवंबर को सुरंग में फंसते ही सुपरवाइजर गबर सिंह नेगी को पानी भरता दिखा। उन्होंने पंप चला दिया। पंप ने पानी खींचा और 4 इंची पाइप के जरिए बाहर फेंकना शुरू किया। पाइप का एक छोर मलबे के दूसरी ओर था, इसलिए रेस्क्यू टीम को पंप की आवाज आ गई। उन्हें एहसास हो गया कि मजदूर जिंदा हैं। फिर इसी पाइप से मजदूरों से बातचीत हुई। उन्हें चने-​बिस्किट भेजे गए।
  • 20 नवंबर को मजदूरों ने खाना मांगा। तब 6 इंच का एक पाइप मलबे में डाला गया। वो आसानी से मजदूरों तक पहुंच गया। इसी के जरिए सॉलिड फूड, जूस आदि भेजे गए। तब जाकर 9 दिन बाद मजदूरों ने खाना खाया।
  • 21 नवंबर को 800 mm चौड़े पाइप अंदर भेजे गए, क्योंकि 900 mm के पाइप आगे नहीं बढ़ रहे थे। यही पाइप तीसरी लाइफ लाइन बने, क्योंकि इनमें रैट माइनर्स आसानी से टनल खोद सके।
मजदूर पाइप में रेंगकर और कुछ स्ट्रेचर पर लेटकर बाहर निकाले गए।

मजदूर पाइप में रेंगकर और कुछ स्ट्रेचर पर लेटकर बाहर निकाले गए।

उत्तरकाशी टनल में रैट माइनर्स ने कैसे काम किया
रैट माइनर्स ने 800mm के पाइप में घुसकर ड्रिलिंग की। ये बारी-बारी से पाइप के अंदर जाते, फिर छोटे फावड़े की मदद से हाथ से खुदाई करते थे। ट्रॉली से एक बार में तकरीबन 2.5 क्विंटल मलबा लेकर बाहर आते थे। पाइप के अंदर इन सबके पास बचाव के लिए ऑक्सीजन मास्क, आंखों की सुरक्षा के लिए विशेष चश्मा और हवा के लिए एक ब्लोअर भी मौजूद रहता था।

रैट होल माइनिंग क्या है?
रैट का मतलब है चूहा, होल का मतलब है छेद और माइनिंग मतलब खुदाई। मतलब से ही साफ है कि छेद में घुसकर चूहे की तरह खुदाई करना। इसमें पतले से छेद से पहाड़ के किनारे से खुदाई शुरू की जाती है और पोल बनाकर धीरे-धीरे छोटी हैंड ड्रिलिंग मशीन से ड्रिल किया जाता है और हाथ से ही मलबे को बाहर निकाला जाता है।

रैट होल माइनिंग नाम की प्रकिया का इस्तेमाल आमतौर पर कोयले की माइनिंग में खूब होता रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर-पूर्व में रैट होल माइनिंग जमकर होती है, लेकिन रैट होल माइनिंग काफी खतरनाक काम है, इसलिए इसे कई बार बैन भी किया जा चुका है।

ये है रैट माइनर्स की टीम, जिन्होंने मैन्युअल ड्रिलिंग करके मजूदरों को बाहर निकाला। ऑपरेशन सफल होने के बाद टीम खुशी मनाती नजर आई।

ये है रैट माइनर्स की टीम, जिन्होंने मैन्युअल ड्रिलिंग करके मजूदरों को बाहर निकाला। ऑपरेशन सफल होने के बाद टीम खुशी मनाती नजर आई।

टनल हादसे की टाइमलाइन

28 नवंबर: टनल से दोपहर 1:30 बजे के करीब ब्रेकथ्रू मिला। मजदूरों तक पहुंचने की खबर मिली। इसके बाद रात 8:35 बजे सभी 41 मजदूरों को बाहर निकाला गया।

27 नवंबर: सुबह 3 बजे सिल्क्यारा की तरफ से फंसे ऑगर मशीन के 13.9 मीटर लंबे पार्ट्स निकाले गए। देर शाम तक ऑगर मशीन का हेड भी मलबे से निकाल लिया गया। इसके बाद रैट माइनर्स ने मैन्युअली ड्रिलिंग शुरू कर दी। रात 10 बजे तक पाइप को 0.9 मीटर आगे पुश भी किया गया। साथ ही 36 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग की गई।

26 नवंबर: उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए पहाड़ की चोटी से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू हुई। रात 11 बजे तक 20 मीटर तक खुदाई हुई। वर्टिकल ड्रिलिंग के तहत पहाड़ में ऊपर से नीचे की तरफ बड़ा होल करके रास्ता बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा- अगर कोई रुकावट नहीं आई तो हम 100 घंटे यानी 4 दिन में मजदूरों तक पहुंच जाएंगे।

25 नवंबर: शुक्रवार को ऑगर मशीन टूटने के चलते रुका रेस्क्यू का काम शनिवार को भी रुका रहा। इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट अरनॉल्ड डिक्स ने कहा है कि अब ऑगर से ड्रिलिंग नहीं होगी, न ही दूसरी मशीन बुलाई जाएगी।

मजदूरों को बाहर निकालने के लिए दूसरे विकल्पों की मदद ली जाएगी। बी प्लान के तहत टनल के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग की तैयारी हो रही है। NDMA का कहना है कि मजदूरों तक पहुंचने के लिए करीब 86 मीटर की खुदाई करनी होगी।

24 नवंबर: सुबह ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिसके चलते पाइप मुड़ गया। स्टील के पाइप और टनल में डाले जा रहे पाइप के मुड़े हुए हिस्से को बाहर निकाल लिया गया। ऑगर मशीन को भी नुकसान हुआ था, उसे भी ठीक कर लिया गया।

इसके बाद ड्रिलिंग के लिए ऑगर मशीन फिर मलबे में डाली गई, लेकिन टेक्निकल ग्लिच के चलते रेस्क्यू टीम को ऑपरेशन रोकना पड़ा। उधर, NDRF ने मजदूरों को निकालने के लिए मॉक ड्रिल की।

23 नवंबर: अमेरिकी ऑगर ड्रिल मशीन तीन बार रोकनी पड़ी। देर शाम ड्रिलिंग के दौरान तेज कंपन होने से मशीन का प्लेटफॉर्म धंस गया। इसके बाद ड्रिलिंग अगले दिन की सुबह तक रोक दी गई। इससे पहले 1.8 मीटर की ड्रिलिंग हुई थी।

22 नवंबर: मजदूरों को नाश्ता, लंच और डिनर भेजने में सफलता मिली। सिल्क्यारा की तरफ से ऑगर मशीन से 15 मीटर से ज्यादा ड्रिलिंग की गई। मजदूरों के बाहर निकलने के मद्देनजर 41 एंबुलेंस मंगवाई गईं। डॉक्टरों की टीम को टनल के पास तैनात किया गया। चिल्यानीसौड़ में 41 बेड का हॉस्पिटल तैयार करवाया गया।

21 नवंबर: एंडोस्कोपी के जरिए कैमरा अंदर भेजा गया और फंसे हुए मजदूरों की तस्वीर पहली बार सामने आई। उनसे बात भी की गई। सभी मजदूर ठीक हैं। मजदूरों तक 6 इंच की नई पाइपलाइन के जरिए खाना पहुंचाने में सफलता मिली। ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू हुई।

केंद्र सरकार की ओर से 3 रेस्क्यू प्लान बताए गए। पहला- ऑगर मशीन के सामने रुकावट नहीं आई तो रेस्क्यू में 2 से 3 दिन लगेंगे। दूसरा- टनल की साइड से खुदाई करके मजदूरों को निकालने में 10-15 दिन लगेंगे। तीसरा- डंडालगांव से टनल खोदने में 35-40 दिन लगेंगे।

21 नवंबर को पहली बार टनल के अंदर 6 इंच की पाइप के जरिए एंडोस्कॉपिक कैमरा भेजा गया था। पहली बार 41 मजदूरों को देखा गया। इसी पाइप से मजदूरों को खाना और जरूरी सामान भेजा जा रहा है।

21 नवंबर को पहली बार टनल के अंदर 6 इंच की पाइप के जरिए एंडोस्कॉपिक कैमरा भेजा गया था। पहली बार 41 मजदूरों को देखा गया। इसी पाइप से मजदूरों को खाना और जरूरी सामान भेजा जा रहा है।

20 नवंबर: इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट ऑर्नल्ड डिक्स ने उत्तरकाशी पहुंचकर सर्वे किया और वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए 2 स्पॉट फाइनल किए। मजदूरों को खाना देने के लिए 6 इंच की नई पाइपलाइन डालने में सफलता मिली। ऑगर मशीन के साथ काम कर रहे मजदूरों के रेस्क्यू के लिए रेस्क्यू टनल बनाई गई। BRO ने सिल्क्यारा के पास वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सड़क बनाने का काम पूरा किया।

19 नवंबर: सुबह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड CM पुष्कर धामी उत्तरकाशी पहुंचे, रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और फंसे लोगों के परिजन को आश्वासन दिया। शाम चार बजे सिल्क्यारा एंड से ड्रिलिंग दोबारा शुरू हुई। खाना पहुंचाने के लिए एक और टनल बनाने की शुरुआत हुई। टनल में जहां से मलबा गिरा है, वहां से छोटा रोबोट भेजकर खाना भेजने या रेस्क्यू टनल बनाने का प्लान बना।

18 नवंबर: दिनभर ड्रिलिंग का काम रुका रहा। खाने की कमी से फंसे मजदूरों ने कमजोरी की शिकायत की। PMO के सलाहकार भास्कर खुल्बे और डिप्टी सेक्रेटरी मंगेश घिल्डियाल उत्तरकाशी पहुंचे। पांच जगहों से ड्रिलिंग की योजना बनी।

17 नवंबर: सुबह दो मजदूरों की तबीयत बिगड़ी। उन्हें दवा दी गई। दोपहर 12 बजे हैवी ऑगर मशीन के रास्ते में पत्थर आने से ड्रिलिंग रुकी। मशीन से टनल के अंदर 24 मीटर पाइप डाला गया। नई ऑगर मशीन रात में इंदौर से देहरादून पहुंची, जिसे उत्तरकाशी के लिए भेजा गया। रात में टनल को दूसरी जगह से ऊपर से काटकर फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्वे किया गया।

16 नवंबर: 200 हॉर्स पावर वाली हैवी अमेरिकन ड्रिलिंग मशीन ऑगर का इंस्टॉलेशन पूरा हुआ। शाम 8 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू हुआ। रात में टनल के अंदर 18 मीटर पाइप डाले गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन की रिव्यू मीटिंग की।

15 नवंबर: रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत कुछ देर ड्रिल करने के बाद ऑगर मशीन के कुछ पार्ट्स खराब हो गए। टनल के बाहर मजदूरों के परिजन की की पुलिस से झड़प हुई। वे रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी से नाराज थे। PMO के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली से एयरफोर्स का हरक्यूलिस विमान हैवी ऑगर मशीन लेकर चिल्यानीसौड़ हेलीपैड पहुंचा। ये पार्ट्स विमान में ही फंस गए, जिन्हें तीन घंटे बाद निकाला जा सका।

14 नवंबर: टनल में लगातार मिट्टी धंसने से नॉर्वे और थाईलैंड के एक्सपर्ट्स से सलाह ली गई। ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रोलिक जैक को काम में लगाया। लेकिन लगातार मलबा आने से 900 एमएम यानी करीब 35 इंच मोटे पाइप डालकर मजदूरों को बाहर निकालने का प्लान बना। इसके लिए ऑगर ड्रिलिंग मशीन और हाइड्रोलिक जैक की मदद ली गई, लेकिन ये मशीनें भी असफल हो गईं।

13 नवंबर: शाम तक टनल के अंदर से 25 मीटर तक मिट्टी के अंदर पाइप लाइन डाली जाने लगी। दोबारा मलबा आने से 20 मीटर बाद ही काम रोकना पड़ा। मजदूरों को पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन और खाना-पानी मुहैया कराया जाना शुरू हुआ।

12 नवंबर: सुबह 4 बजे टनल में मलबा गिरना शुरू हुआ तो 5.30 बजे तक मेन गेट से 200 मीटर अंदर तक भारी मात्रा में जमा हो गया। टनल से पानी निकालने के लिए बिछाए गए पाइप से ऑक्सीजन, दवा, भोजन और पानी अंदर भेजा जाने लगा। बचाव कार्य में NDRF, ITBP और BRO को लगाया गया। 35 हॉर्स पावर की ऑगर मशीन से 15 मीटर तक मलबा हटा।

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