भास्कर में सबसे पहले अग्निकांड की गवाह की आंखों देखी: कमला नेहरू हॉस्पिटल में तैनात नर्स बोलीं- वेंटिलेटर फटा, थोड़ी ही देर में पूरा वार्ड धुएं से भर गया

भोपाल8 घंटे पहलेलेखक: आनंद पवार

8 नवंबर की रात 8.30 बजे कमला नेहरू हॉस्पिटल का SNCU वार्ड धधक रहा था। वार्ड में ड्यूटी पर तैनात नर्स राजेश राजा बुंदेला इस रात को याद कर अब भी सिहर जाती हैं। राजेश बच्चों की जान बचाते-बचाते बेहोश होकर वहीं गिर पड़ी थीं। उन्होंने 8-10 बच्चों को बचाया। आधा घंटे तक नवजातों को बचाती रहीं। मदद के लिए कॉल भी लगाती रहीं। रात 9.11 बजे लास्ट कॉल लगाया। इसके बाद उन्हें रात 12.30 बजे अस्पताल के पलंग पर होश आया। उन्होंने होश आने पर सबसे पहले दैनिक भास्कर से बात की। आइए उन्हीं से जानते हैं, उस रात क्या हुआ था…

मेरी नाइट ड्यूटी चल रही थी, रात 8 से सुबह 8 बजे तक। मैं वार्ड में थी। सामने बच्चे को क्लीयर कर रही थी। मेडिसन वगैरह कर रही थी। आउटवार्ड में वेंटिलेटर में ब्लास्ट हुआ। अपना नहीं सोचा, बच्चों का सोचा। सब कुछ छोड़कर जितना बना, उतने बच्चे उठाए। किसी बच्चे को ऑक्सीजन लगा था तो कोई वेंटिलेटर पर था… जैसे बना, वैसे वहां से निकाला। दौड़-दौड़कर बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करते जा रहे थे। बाहर सारे अटेंडर थे। बच्चों को बचाते हुए पता ही नहीं पड़ा, कब काला धुआं फैल गया… इतना काला धुआं भर गया था कि कुछ समझ नहीं आया।

कुछ देर बाद तो कुछ भी नहीं दिख रहा था कि कहां जाऊं, क्या करूं, कैसे करूं। कम से कम 20 बच्चे थे वार्ड में… 8-10 बच्चों को निकाला। बाकी फिर पता नहीं चला… ऑक्सीजन नहीं ले पा रही थी। वार्ड की खिड़की तोड़-तोड़कर ऑक्सीजन ली। फिर वहीं बैठ गई और बेहोश हो गई… पता ही नहीं पड़ा मुझे।

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