बच्चों के कोरोना वैक्सीनेशन की तैयारी: प्राइवेट अस्पताल डेटाबेस जुटा रहे, स्कूलों में जाकर भी टीके लगाए जाएंगे; केंद्र की मंजूरी का है इंतजार

कोलकाताकुछ ही क्षण पहले

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देश में बच्चों को कोरोना के टीके लगाने की शुरुआत जल्द होने वाली है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस बारे में अभी कोई ऐलान नहीं किया है, लेकिन कई अस्पतालों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलकाता में कई प्राइवेट अस्पताल बच्चों के लिए वैक्सीनेशन सेंटर बना रहे हैं। वे बच्चों के डेटाबेस जुटा रहे हैं और स्कूलों से भी टाइअप कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को टीके लगाए जा सकें।

2-18 साल के बच्चों को लगेगी कोवैक्सिन
कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने कोवैक्सिन के डोज खरीदने भी शुरू कर दिए हैं। बता दें भारत बायोटेक की कोवैक्सिन अभी 18+ वालों को लगाई जा रही है। कंपनी ने बच्चों पर भी इसी वैक्सीन के ट्रायल किए हैं। बच्चों के लिए कोवैक्सिन को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने इमरजेंसी अप्रूवल दे दिया है, लेकिन ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अप्रूवल मिलना अभी बाकी है। यह वैक्सीन 2 से 18 साल तक के बच्चों लगाई जाएगी।

अस्पतालों का कहना है कि बच्चों का वैक्सीनेशन जल्द शुरू होने की उम्मीद है, इसलिए वे अपनी तैयारियां पूरी रखना चाहते हैं। कोलकाता के RN टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज ने शुक्रवार को कोवैक्सिन के 20 हजार डोज का ऑर्डर दिया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कुछ हफ्तों पहले कोवैक्सिन के डोज खत्म हो गए थे, लेकिन हमने ऑर्डर नहीं किए क्योंकि डिमांड काफी कम थी। अब बच्चों के वैक्सीनेशन को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है, इसलिए हम फिर से डोज खरीद रहे हैं।

नारायणा हेल्थ अस्पताल का कहना है कि कई स्कूलों, रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्सेज और कॉरपोरेट्स से चर्चा की जा रही है। बच्चों के वैक्सीनेशन को लेकर पिछले कुछ दिनों में रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशंस और कॉरपोरेट्स की तरफ से पूछताछ का सिलसिला काफी बढ़ गया है।

डेटाबेस होने से भीड़ कंट्रोल करने में मदद मिलेगी
अपोलो हॉस्पिटल भी अपने पर ऐप पर बच्चों के डेटा डेटा अपलोड करने की सुविधा दे रहा है ताकि वैक्सीनेशन शुरू पर डिमांड का अंदाजा लगाया जा सके। इसकी वजह ये भी है कि जब 18+ का वैक्सीनेशन शुरू हुआ था तो अपोलो ग्रुप के अस्पतालों में काफी भीड़ देखी गई थी। इसलिए पहले से डेटाबेस होने पर भीड़ को कंट्रोल करने में मदद मिल सकेगी।

बच्चों के लिए किन वैक्सीन को मिली है मंजूरी?

  • अक्टूबर में नेशनल ड्रग्स रेगुलेटर की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने कोवासिन को बच्चों के लिए इमरजेंसी यूज की सिफारिश की थी। इस वैक्सीन को अब DGCI से अप्रूवल मिलना बाकी है। इसे 2-18 साल के बच्चों को लगाया जा सकेगा।
  • सरकार ने जायकोव-डी को भी बच्चों के वैक्सीनेशन लिए अप्रूव किया है। जाइकोव-डी को जाइडस कैडिला ने बनाया है। DGCI ने अगस्त में कैडिला को अप्रूवल दिया था। वैक्सीन को 12 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों के लिए इमरजेंसी यूज अथॉराइजेशन (EUI) की मंजूरी मिली है।

जाइकोव-डी को अगस्त में अप्रूवल मिला, अब तक मार्केट में क्यों नहीं आ सकी?

  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी वैक्सीन की कीमत 1900 रुपए रखना चाहती है। वहीं, सरकार वैक्सीन की कीमत को कम करवाना चाह रही है। इसके लिए सरकार और कंपनी के बीच बातचीत भी चल रही थी और अब दोनों के बीच कीमत को लेकर सहमति बन गई है।
  • तीसरे फेज के ट्रायल में वैक्सीन की एफिकेसी 66% थी। पहले के 2 ट्रायल में भी किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला था, लेकिन कंपनी ने अभी तक तीसरे फेज की ट्रायल्स के डेटा को रिलीज नहीं किया है। वैक्सीन आने में हो रही देरी की एक वजह ये भी है।
  • वैक्सीन की उपलब्धता भी एक मसला है। फिलहाल कंपनी हर महीने वैक्सीन के करीब 1 करोड़ डोज उपलब्ध कराने की बात कह रही है। ऐसे में शुरुआत में डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने का भी चैलेंज दिखाई देता है।

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