तेलंगाना में BRS या कांग्रेस फैसला आज: अलग राज्य का आंदोलन करने वाले KCR 10 साल से मुख्यमंत्री, इस बार एग्जिट पोल में कांग्रेस आगे

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हैदराबाद10 मिनट पहले

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भारत राष्ट्र समिति (BRS), कांग्रेस या भाजपा, तेलंगाना में इस बार किसकी सरकार बनेगी? इस सवाल का जवाब आज दोपहर तक मिल जाएगा। राज्य की 119 विधानसभा सीटों पर 30 नवंबर को 70.66% वोटिंग हुई थी। यह 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2.76% कम है। तब 73.37% मतदान हुआ था।

वोटिंग खत्म होने के ठीक एक घंटे बाद यानी शाम 5:30 बजे 4 अन्य राज्यों के साथ तेलंगाना के भी एग्जिट पोल आए। इसमें 10 साल से सत्ता में टिके BRS सुप्रीमो के चंद्रशेखर राव (KCR) की कुर्सी खिसकती नजर आ रही है। पोल के अनुमान में कांग्रेस बहुमत के करीब दिख रही है।

जून 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना नया राज्य बना था। इसी साल राज्य में विधानसभा का पहला चुनाव हुआ। इसमें तेलंगाना को अलग राज्य बनाने के लिए आंदोलन करने वाली पार्टी TRS (तेलंगाना राज्य समिति, जो अब भारत राष्ट्र समिति BRS हो गई है) को बहुमत मिला।

TRS को तब 63, कांग्रेस को 21, TDP को 15 और अन्य को 20 सीटें मिलीं। तेलंगाना की अलग मांग को लेकर आंदोलन करने वाले TRS के नेता के. चंद्रशेखर राव राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने।

2018 में दोबारा KCR मुख्यमंत्री बने, सीटें पहले से ज्यादा हुईं
2018 में दूसरी बार हुए विधानसभा चुनाव में KCR और मजबूती के साथ उभरे। इस बार उनकी पार्टी को 88 सीटें मिलीं। यानी पिछली बार के मुकाबले 25 सीटें ज्यादा। कांग्रेस को दो सीटों के नुकसान के साथ 19, AIMIM को 7 और भाजपा को एक सीट पर जीत मिली।

फिलहाल सत्ताधारी BRS के पास 119 विधानसभा सीटों में से 101 विधायक हैं। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पास 7 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 5, भाजपा के पास 3, AIFB के पास 1, एक नॉमिनेटेड और एक निर्दलीय विधायक है।

एग्जिट पोल क्या कह रहे
तेलंगाना में 30 नवंबर को विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होने के बाद 9 एग्जिट पोल सामने आए। इनमें से 7 पोल में कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े 60 से पार बताया गया है। 3 पोल में वह बहुमत से 3 से 6 सीट दूर दिख रही है। वहीं मौजूदा सत्ताधारी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BSR) 50 सीटों पर सिमटती दिख रही है। भाजपा को ज्यादा से ज्यादा 10 सीटें ही मिल रही हैं।

पोल ऑफ पोल्स यानी सभी एग्जिट पोल के औसत आंकड़ों में भी कांग्रेस बहुमत के पार है। इसमें कांग्रेस को 65, BRS को 43, भाजपा को 7 और अन्य को 4 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है।

तेंलगाना की राजनीति के तीन बड़े चेहरे

1. BRS सुप्रीमो और CM के चंद्रशेखर राव
तेलंगाना के दो बार से मुख्यमंत्री KCR का पूरा नाम कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव है। उनकी अगुआई वाली भारत राष्ट्र समिति (BRS) 2014 से राज्य में सत्ता में हैं। फिलहाल वे अपनी पारंपरिक सीट गजवेल से विधायक हैं। इस बार KCR गजवेल के अलावा कामारेड्डी से भी चुनाव लड़ रहे हैं।

KCR गजवेल से दो बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार गजवेल सीट से KCR की सरकार में स्वास्थ्य और वित्त मंत्री रह चुके इटाला राजेंद्र भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। वे 2021 में भाजपा में चले गए थे। यह पहला मौका है जब भाजपा ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा है। इटाला गजवेल के साथ अपनी हुजूराबाद सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं।

KCR कामारेड्डी सीट से पहली बार चुनावी मैदान में हैं। यहां उनका मुकाबला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी से हैं। बीजेपी ने इस सीट से वेंकट रमन्ना रेड्डी को उतारा है। जिससे इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।

KCR 1980 में युवा कांग्रेस से जुड़े। 1983 में उन्होंने तेलुगू देशम पार्टी (TDP) का दामन थामा और सिद्दीपीट सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 1985 में उन्हें इस सीट से जीत मिली। 1987 से 1988 तक KCR आंध्र प्रदेश में राज्यमंत्री रहे। 1999 से 2001 तक KCR आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे।

फिर KCR ने तेलंगाना राज्य की मांग उठानी शुरू की। उन्होंने TDP से किनारा कर लिया। 27 अप्रैल 2001 को KCR ने तेलंगाना राष्ट्र समिति का गठन किया। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और पांच सीटों पर जीत हासिल की। 2009 का लोकसभा चुनाव उन्होंने TDP के साथ मिलकर लड़ा।

इसके बाद KCR ने तेलंगाना राज्य के लिए आमरण अनशन शुरू किया। तब के केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने 9 दिसंबर 2009 को घोषणा कर दी कि तेलंगाना को अलग राज्य बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद KCR ने अपना 11 दिन का अनशन समाप्त किया।

2. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद रेवंत रेड्डी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद रेवंत रेड्‌डी को तेलंगाना का डीके शिवकुमार बोला जाता है। वे मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के खिलाफ कामारेड्‌डी से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा वे कोडंगल सीट से भी किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से उन्हें CM पद का दावेदार माना जा रहा है।

महबूबनगर जिले के कोंडारेड्डी पल्ली में जन्मे 54 साल के रेवंत का पूरा नाम अनुमुला रेवंत रेड्डी है। उस्मानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट रेवंत ने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा की स्टूडेंट विंग ABVP से की थी। 2007 में वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर आंध्र प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी चुने गए।

बाद में आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू के न्योते पर वे तेलुगु देशम पार्टी (TDP) में शामिल हो गए। 2009 में उन्होंने TDP के टिकट पर आंध्र प्रदेश के कोंडगल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के पांच बार के विधायक गुरुनाथ रेड्डी को हराया। नायडू ने उन्हें विधानसभा में पार्टी का नेता भी बना दिया।

TDP में इस बात की चर्चा होने लगी कि रेवंत कांग्रेस से नजदीकी बढ़ा रहे हैं। 2017 में TDP ने उन्हें अपने नेता सदन के पद से हटा दिया। कुछ दिनों बाद ही रेवंत कांग्रेस में शामिल हो गए। 2018 के चुनाव में रेवंत फिर कोडंगल से लड़े और हार गए।

2019 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने मल्काजगिरी सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार संसद पहुंचे। जून 2021 में कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें सीनियर नेता एन. उत्तम रेड्डी की जगह तेलंगाना की कमान सौंपी। इससे एक खेमा काफी असंतुष्ट था।

रेवंत कैश फॉर वोट मामले में जेल में भी रहे। उन पर LLC चुनावों में पैसे देकर वोट खरीदने का आरोप लगा। मौजूदा चुनावों में भी उन पर पैसे लेकर पार्टी टिकट देने के आरोप लग रहे हैं। तेलंगाना सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के बेटे KTR ने तंज कसते हुए रेवंत से पूछा था कि क्या रेट (टिकट का) चल रहा है रेड्डी?

रेवंत का विवाह संयुक्त आंध्र प्रदेश के कद्दावर नेता जयपाल रेड्डी की भतीजी गीता से हुआ। गीता के परिवार के शुरुआती विरोध के बावजूद रेवंत अपने प्यार को शादी के बंधन तक पहुंचाने में कामयाब रहे।

3. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्‌डी
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष जी किशन रेड्डी का पूरा नाम गंगापुरम किशन रेड्डी है। वे सिकंदराबाद से सांसद और पर्यटन, संस्कृति और उत्तर-पूर्वी विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। लोग उन्हें किशन अन्ना के नाम से भी जानते हैं।

जी किशन रेड्डी रंगारेड्डी जिले के तिमापुर गांव के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने साल 1977 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता पार्टी में युवा कार्यकर्ता के रूप में की थी। वे जनता पार्टी में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चलाए गए आंदोलन से प्रेरित होकर आए थे।

जब 1980 में भाजपा की स्थापना हुई तो वे पार्टी के साथ जुड़ गए। पार्टी ने रेड्डी को आंध्र प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। उन्हें फिर आंध्र प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया गया।

साल 2004 में जी किशन रेड्डी हिमायतनगर सीट से भाजपा विधायक चुने गए। इसके बाद वे लगातार दो बार अंबरपेट सीट से विधायक चुने गए। साल 2019 में रेड्डी सिकंदराबाद से बीजेपी सांसद चुने गए। उन्होंने 30 मई 2019 को भारत सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री पद की शपथ ली। 2021 में उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर बना दिया गया।

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