केरल हाईकोर्ट का केंद्र से सवाल: टीके के चलते किसी की नौकरी चली जाए तो क्या सरकार अर्जी नहीं सुनेगी?

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कोच्चि10 मिनट पहले

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अदालत ने कहा कि सरकारी टीका लगाए जाने से किसी नागरिक का रोजगार छिनना या यात्रा पर प्रतिबंध होना, उसके मौलिक अधिकारों का हनन है।

अगर सरकार द्वारा लगाए जा रहे टीके से किसी की नौकरी छिन जाए तो क्या उसकी शिकायत सुनना सरकार का दायित्व नहीं है? केरल हाईकोर्ट ने यह सवाल मंगलवार को केंद्र सरकार ने किया है। इसके साथ ही इस मामले में दायर एक याचिका पर सरकार से जानकारी मांगी है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त टीके की तीसरी डोज लेने की अनुमति दी जाए, ताकि वह सऊदी अरब लौट सके।

वह सऊदी में कोरोना महामारी से पहले वेल्डर के तौर पर काम करता था। याचिकाकर्ता का तर्क है सऊदी अरब में कोवैक्सीन को मान्यता नहीं है। ऐसे में उसे वहां जाने की मंजूरी नहीं मिल पा रही है। इसलिए याचिकाकर्ता ने टीके की तीसरी डोज के लिए कोर्ट में याचिका लगाई है। जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि हम केंद्र सरकार पर दोषारोपण नहीं कर रहे।

अदालत ने कहा कि सरकारी टीका लगाए जाने से किसी नागरिक का रोजगार छिनना या यात्रा पर प्रतिबंध होना, उसके मौलिक अधिकारों का हनन है। अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सहायक सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनु एस को निर्देश दिया कि वह पता करें सऊदी में कोवैक्सीन को मंजूरी क्यों नहीं मिली है, जबकि इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन मंजूरी दे चुका है।

कोर्ट के इस सवाल पर एएसजी ने कहा कि महामारी में जान बचाना प्राथमिकता थी, इसलिए केंद्र सरकार उस समय टीके की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के लिए इंतजार नहीं किया। उन्होंने कहा कि दबाव बनाने के मामले में सरकार की अपनी सीमाएं हैं। उनकी दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई 29 नवंबर तक टाल दी।

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